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Old Fox 004

Sunday, April 14, 2013

जिन खामोशियों से डर रहे थे . . .













जिन खामोशियों से डर रहे थे
आज उन्हीं खामोशियों के सहारे हो तुम,
जिस जगह दुबारा आना नहीं चाहते
आज वहीँ आ रुके हो तुम।  

जाने यहाँ कौन सा सामान पड़ा है तुम्हारा
पुरानी चीजों का तुम्हें शौक तो नहीं
देखो, यहाँ राख बना पडा है सारा
किसी भी तस्वीर में तुम्हारा नाम ही नहीं। 

"हम यादों मे जिंदगी बिता देंगे" कहकर
अपने ही अंदाज़ में जीते थे तुम
शहर को छोड़, अपनों को भुला कर 
नई राह पर चल दिए तुम । 

वक्त ने ना साथ दिया तुम्हारा 
यादें खीँच ले आयी दुबारा, 
बिन बुलाये मेहमानों की तरह
आज फिर लौट आये हो तुम।

जिन खामोशियों से डर रहे थे
आज उन्हीं खामोशियों के सहारे हो तुम,
जिस जगह दुबारा आना नहीं चाहते
आज वहीँ आ रुके हो तुम।

Image courtesy: InternetMonk

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